Saturday, 30 June 2012

दांपत्य सुख विचार


दांपत्य
सुख विचार
                                                                ज्योतिष शिरोमणि  पदम् कुमार ,बठिंडा
                                                                  09815075493 
दांपत्य
सुख
विचार हेतु गुरु,शुक्र,मंगल के अतिरिक्त सप्तमेश,सप्तम भाव पर पड़ने वाले प्रभावों आदि का विश्लेषण भी अति आवश्यक है.परन्तु मेरे दृष्टिकोण में वास्तु का भी विचार किया जाना प्रासंगिक होगा.आओ सफल,सुखद दांपत्य जीवन के लिए मुख्य तत्वों को समझाने का प्रयास करें.
1.गुरु का प्रभाव यदि
किसी की कुंडली में गुरु दोष यां पाप रहित है गुरु की सप्तम भाव पर शुभद्रष्टि हो तो वैवाहिक जीवन में किसी प्रकार की परेशानियाँ आदि ना बनाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. अर्थात गुरु[लाल किताब के अनुसार बड़ों का प्रभाव] विवाहिक जीवन को निरापद बना रखता है.
 2.शुक्र का चक्कर
रतिसुख का कारक है शुक्र.यदि रति सुख नहीं तो फिर गड़बड़ जरुरी है.ईस लिए शुक्र बल भी अति आवश्यक है.यदि शुक्र [स्व राशि ,उच्च ,केंद्र यां त्रिकोण में] पूर्ण बली-पाप प्रभाव से रहित हो तो भी सुखद विवाहिक जीवन की आशा बलवती रहती है मांगलिक दोष विचार
मांगलिकदोष भारतीय जन मानस में विवाह पूर्व विचार किया जाने वाला सबसे
महत्वपूर्ण तत्व है यह सभी जानतें हैं क़ि ,यदि लग्न ,चोथे,सातवें ,आठवें यां
बाहरवें भाव में मंगल हो तो मांगलिक योग होता है.परन्तु दक्षिण भारत के
विद्वान दुसरे भाव के मंगल को भी मांगलिक मान कर उपाय करतें हैं.आओ मांगलिक
दोष के कारण होने वाले प्रभावों पर भी चर्चा कर लें .अनुभव में आया है क़ि
मांगलिक दोष होने पर:-
. विवाह में देरी हो सकती है.
. विवाह के बाद तालाक तक की नौबत सकती है,
.प्रतिदिन क़ि तूं-तूं ,में-में.ओर झगडे हो सकते हैं.
.विचारों में भिन्नता ,मुकदमेंबाजी,लडाई झगडे ,तोह्मत्बाजी आदि क़ि घटनाएँ आम
हो सकती है,
पर एक बात और यह जानना भी जरूरी है क़ि जातक कितने प्रतिशत मांगलिक
है.जन्म समय लग्न संधि तो नहीं थी मांगलिक दोष भंग तो नही हो रहा था.यह भी सत्य है क़ि दुनिया की कुल आबादी
के ४० प्रतिशत जातक मांगलिक दोष यां मंगल के प्रभाव में है.परन्तु सभी
मांगलिक मृत्यु ,एक्सीडेंट,झगडे,अवनति,यां तलाक आदि का कारण बनतें हैं,यह भी
पूरा सत्य नहीं है. पर फिर भी अनुभव में आया है क़ि मांगलिक की शादी मांगलिक से करना ही
ज्यादा सुरक्षित है, मेरे पास एसी सेंकडों कुंडलियाँ हैं जो प्रमाण हैं क़ि
मांगलिक के नान-मांगलिक से विवाह भी बहुत सुखद व् संपन्न वातावरण में चल ही
रहे और प्रफुलित भी हो रहे है.परन्तु आम जनता से मेरा अनुरोध है क़ि विवाह
से पूर्व जातक की कुंडली किसी विद्वान् ज्योतिषी को दिखा कर मांगलिक विवेचना
अवश्य करवा लें ,एसा हो क़ि आप क़ि आज की मामूली भूल कल के लिए
बड़ी समस्या बन जाये.वधु को जला देने ,क़त्ल कर देने,पर पुरष यां
पर नारी सम्बन्ध ,घर से निकल देने ,आपनी ही साली-देवर यां अन्य
रिश्तेदार,मिलने जुलनेवालों आदि से सम्बन्ध भी मंगल पर अन्य ग्रहों के
पड़ने वाले प्रभावों आदि के कारण ही होती है.
मांगलिक दोष शांति के सरलतम उपाए :-
. प्रतिदिन  हनुमान चालीसा  का पाठ करें.
.प्रतिदिन महा मृत्युन्जय मंत्र का पाठ करें.
.पक्षियों को मीठी रोटी डालें.
.घर में हाथी दन्त रखें .
.पीपल [रविवार को नहीं]को गुर डाल कर कच्ची लस्सी डालें.
.प्रतिदिन सिन्धुर्वदन गणेश जी का पूजन करें.
.श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ भी हर प्रकार से शुभ है.
.गायत्री महामंत्र का जप भी शुभ कारी है
अन्य उपाय:-
यदि आप किसी हथियार बनानेवाले यां चाकू-छुरी बनाने वाले को जानते हैं तो उसे
लाल वस्त्र दान करें.
हनुमान जी को मंगलवार को प्रसाद जरूर चढ़ाएं.
तिकोना मूंगा रिंग फिंगर में सोने यां ताम्बे में धारण करें.
ऑउम श्रीं हनुमते नम : मंत्र का लाल चन्दन  की  माला पर प्रतिदिन यां मंगलवार
को जप कर सकते हैं.
वास्तु दोष और विवाहिक सुख  :-
पति पत्नी दक्षिण पश्चिम का बेड रूम ही प्रयोग  करें.
,बेड लकड़ी का ही हो
.बेड चोरस यां वर्गाकार ही हो.
.बेड रूम में लाईट रंगों का प्रयोग अधिक करें.
                विशेष रंग जो प्रयोग किये जा सकते हैं                                    अ.पिंक रंगक्रोध को शांत करता है.
                               बी.लाल रंग आकर्षण का रंग है.
                             क लाल रंग से रोमांस बढ़ता है.
                                डी.ब्लू रंग प्रेम का रंग है.
                       इ.ओरेंज रंग शुद्धता का रंग है.
कमरे में लाइट ईस तरह लगाये क़ि प्रकाश दक्षिण-पूर्व से आये.
अन्य आवश्यक तत्व
 बेड रूम में शीशा हो यदि हो तो उसे ढक कर रखें.
बेड रूम में डरावने यां मौत के चित्र ना हों.
बीम के नीचे ना सोयें.
दक्षिण-पूर्व में टेंक ना हो.
साउथ -पूरब से अच्छा परकाश आना अच्छा प्रकाश आना अच्छी  वास्तु की निशानी है

विवाह में बाधा दूर करने के लिए
पुरषों का बेद रूम उत्तर-पूरब दिशा में हो
लड़कियों का
बेड रूम उत्तर यां उत्तर पश्चिम में हो.
. दरवाजे यां खिडकीयां काली ना हो .अधूरे बने कमरों में उन्हें ना रहने दें.
,कमरे में दरवाजे एक से अधिक हों.
.उत्तर दिशा में गोल कंचों से भरा प्याला रखें.
.उनके बेड के नीचे यां ऊपर ज्यादा भारी सामान हो
..रंग पिंक,पीला,यां ब्रैईट लाइट हो.
.जिस कमरे का दरवाजा मुख्य दरवाजे की और हो उसी में विवाह संबधी बातचीत करें'.
.दक्षिण पूरब में पानी का टेंक विवाह में देरी का मुख्य कारन है.ईस से झगडे
बढ़ें गे और तलाक तक क़ि नोबत सकती है.
लड़कियों क़ि शादी के लिए पियोनिया का फूल की तस्वीर बेड रूम के बहार लगायें.
चार्ज किया हुआ क्र्यस्तल बाल उतर दिशा में रखें.
काले रंग  का प्रयोग  ना करें.
वीरवर को किसी गरीब लड़की को पीली सढी दान करें.
दो मुखी रुद्राक्ष धारण करें .
पूर्णिमा को एक मीठा संतरा जल प्रवाह करें.
पूर्णिमा को एक बाल्टी पानी बहार चाँद की रोशनी में रख कर उसी जल में स्नान
करें.चंद्रमा का चित्र कमरे में लगायें
विवाह का प्रस्ताव ले कर आये वियक्ति को ईस प्रकार बिठाएं क़ि उस का मुंह
मुख्य दरवाजे की और ना हो.
दक्षिण दिवार के मध्य दरवाजा होने से विवाह में रूकावट आती है.
चित्र मेरे बनाने नहीं आते आप चाहे तो बना सकते है.सब खुद ही टाइप क्या है गलतियां  देख लेना

हनुमान तंत्र साधना की शक्ति और गुर-पूर्णिमा पर करने योग्य साधना

हनुमान  तंत्र  साधना  की शक्ति  और गुर-पूर्णिमा पर करने योग्य साधना
                                             ज्योतिषी पदम् कुमार ,बठिंडा 9815075493

                  कुछ साल पुरानी बात है.मध्य-प्रदेश के एक छोटे से गाँव में भयंकर महामारी फेफैल  गयी सरकार और समाज सेवी-संस्थाओं के अथक प्रयासों के बाबजूद भी महामारी विकराल से विकराल होती गयी बच्चे-.बूढ़े सभी त्राहि-त्राहि कर रहे थे.मौत का आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था हैरानी  इस बात की थी क़ि इस गाँव में तो रोग तांडव मचा रहा था पर पडौस के गाँव में कोई असर नहीं था.कारण भगवान् जाने.उस पर तुर्रा ये क़ि गाँव व् जिले में उपलब्ध
डाक्टरों की सारी कोशिशें नाकाम हो रही थी  लगता था क़ि लोगों का भरोसा अब मेडीकल साइंस से उठाता जा रहा था ,निराश गाँव निवासी थक-हार कर नजदीक गाँव के एक संन्यासी की शरण में पहुंचे सन्यासी ने उन्हें गाँव के बाहर हनुमान जी का मंदिर बनाने की सलाह दी.उसी दिन से मंदिर  स्थापना का कार्य आरम्भ हो गया.शाश्त्र विधी अनुसार दैनिक  हवन-यग होने लगे  सारा गाँव बड़ी श्रधा भक्ती से  हनुमान जी की सेवा में जुट गया वेद-मन्त्रों की धव्नियां गूंजने लगी.एक-एक दिन करके गाँव से रोग-शोक दूर भागने लगे.मौतों और रोगियों की संख्या प्रतिदिन कम होती जा रही थी.सभी के घरों में फिर से खुशी के ठहाके गूंजने शुरू हो गए .यह था हनुमान जी का साधना का प्रभाव की जो काम सारी मेडीकल साइंस ना कर पायी हनुमान जी की साधना ने कर दिखाया आप के लिए एक विशेष सन्देश :-
             गुर-पूर्णिमा  का पर्व निकट है आप भी गुरुदेव जी की तरह कृपा करने वाले हनुमान जी की साधना कर अपने परिवार और नगर को दुःख -शोक-रोग से मुक्त कर सुख-समृधी भरा जीवन जी सकते हैं
तरीका इस प्रकार है:-शनीवार रात 10 बजे के लगभग स्नान आदि करके लाल-वस्त्र धारण करें लकड़ी के एक पाते पर लाल कपड़ा बिछा कर कपडे पर लाल सिन्धुर छिडकें.लाल आसन पर वीर-आसन यां सुखासन में बैठ कर लाल कपडे पर शुद्ध हनूमान यंत्र स्थापित करें गुरु का ध्यान-पूजा कर जोत जगाएं माथे पर सिन्धुर का तिलक लगा यंत्र को लाल फूल और लाल फल अर्पित करें लाल माला के साथ निम्न मन्त्र की 21 माला करें.
Om Namo Bhagawate Anjaneyaay Mahaabalaay Hanumate Namah
॥ ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय हनुमते नमः ॥
साधना के बाद वहीं जमीन पर ही लेट जाएँ.यदि आप 11 दिन लगातार फलाहार पर रहते हुए यह साधना कर पाए तो हनुमान जी की कृपा से सारे घर में धन-सुख समृधि का अम्बार लग जाएगा.हनुमान जी सदा आपके अंग संग रह कर रक्षा करने को तत्पर रहेंगे.जीवन में बहारें आ जाएँ गी जिस प्रकार उस रोग पीड़ित गाँव के कष्ट दूर हुए थे आप भी रोग-शोक से कोसों दूर आन्दमयी जीवन जी सकेंगे