Thursday, 20 March 2008

श्री राम स्तुति

श्री राम चन्द्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारूणम।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारूणमऽऽ

कंदर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुंदरम।
पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनकसुतावरमऽऽ

भज दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकंदनम।
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथनंदनमऽऽ

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारू उदारू अंगविभूषणम।
आजानुभुज शरचाप धर संग्रामजित खरदूषणमऽऽ

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम।
मम हृदयकुंज निवास कुरू कामादि खलदल गंजनमऽऽ

_ तुलसीदास

Monday, 10 March 2008

पारद शिवलिंग

सभी प्रकार के वास्तुदोष निवारण का
एक दम सही प्रभावी उपाए
पारद शिवलिंग
शास्त्रों में वर्णित है के पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही ब्रह्महत्या -गोहत्या जैसे पाप नष्ट हो जातें हैं । पारदाशिवलिंग के पूजन से करोडों शिवलिंगों की पूजा से अधिक पुण्य मिलता है। पारद शिवलिंग की पूजा से धर्म-अर्थ -काम मोक्ष तथा आरोग्य प्राप्त होता है।
भारतीय दर्शन के अनुसार सृष्टि का निर्माण शिव और शक्ति के संयोग से हुआ है। पारद शिवलिंग की व्याख्या करते हुए व्याखायाकारों ने लिखा है की प=विष्णु ,अ=कालिका,र=शिवतथा डी=ब्रह्मके बीज अक्षर में चमत्कारिक सिद्धि है.बाण भट्ट के अनुसार जो भी पारद शिवलिंग की पूजा करता है,तीनों लोकों स्थित ज्योर्तिलिंगों की पूजा का फल मिलता है.संक्षेप में ,पारद शिवलिंग संसार में एक अद्वितीय आलोकिक ,अदभुत,अकथनीय ,अकल्पनीय ,अवर्णनीय ऑउर अप्रत्याशित रूप से चमत्कारिक अत्यन्त दुर्लभ वस्तु है। इसे आफिस ,फेक्टरी,दूकान ,संस्थान,व्यापार व्यापारस्थल,अर्थात किसी भी स्थान पर विधिपूर्वक स्थापित करके नित्य दर्शन मात्र से ही सभी प्रकार के रोग शोक -वास्तुदोष दूर होते है.ऑउर हर प्रकार की सफलता प्राप्त होती है । यदि आपको पार्दशिवलिंगप्राप्त करने में कोई कठिनाई आ रही है ततो सीधे हमारे से पत्र व्यवहार करें या लिखें । श्री दुर्गा ज्वेल्लेर्ज़ ४००१ कोर्ट रोड ,जनता मार्केट भटिंडा [पंजाब]मो-०९८१५०७५४९३ यान ज्योत्शी पदम कुमार

Ashavgangha ek shareshth baldayee rasayan

Ashavgandha vah baldaee aushdhee hai jo sare sansar men bade vayapk paimane par alag alag namo se bahut uunnche damon men bik rahii hai.Atamdarshan Educational Society ne ashavgandha bilkul lagat kimat par shudh roop men ghar ghar pahuchane ka bidda uthayaa hai eis ke liye 100 gm. ki kimat matar 20/- rakhee gayee hai.aap bhee apney tatha apney parivar ke liyeASHAVGANDHA mahan shaktivardhak oushdhee mangvakar labh utha saktey hain .Send your demands to Jotshi Padam Kumar 98150 75493 at 5235 malvia nagar st no. 1 nai basti BHATINDA 151001 [pb.]

Saturday, 8 March 2008

प्राकृतिक च्कित्सा के मूल सिद्धांत

प्राकृतिक चकित्सा प्रणाली तीन मूल सिद्धांतो पर आधारित है ।जो इस प्रकार हैं :-
१ विसर्जन प्रणाली -कब्ज यां विसर्जन प्रणाली सभी रोगों की मां है। कब्ज अर्थात विसर्जन योग्य यां फालतू पदार्थों का शरीर से बाहर न निकलना । एक सामान्य प्राणी में ये विसर्जन पदार्थ विभिन विसजन अंगो से बाहर निकल जातें हैं ,जब के रोगी के शरीर में ये फालतू पदार्थ धीरे धीरे इकठेहोते रहतें हैं । कारण भोजन की गलत आदतें .तरीके ,ऑउर भोजन पदार्थ इस के अतिरिक्त अधिक चिंता ,अत्यधिक श्रम.आलस्य ,बेवक्त सोना ,गलत स्तिथि में यां चलते फिरते खाना-पीना आदि कई बार व्यर्थ की चेष्ठएं भी विसर्जन पर्नाली में अव्यवस्था का कारण बन जाती हैं ।
अधिक दवाई का प्रयोग -बुखार,सर्दी ,जुकाम,पेट की गडबडी आदि कई प्रकार के रोग हमारे शरिम ईक्ठीहो गई गंदगी को बाहर निकलने का एक प्रयास मात्र हैं । विशेषज्ञों ने आपने अनुसिधंतों में पाया है कि हृदय रोग ,ब्लड-प्रेशर,मदुमेह[दिअब्तिजगुर्दे के रोग ,नेमोनिया आदि दवाईयों ,ईन्जेक्स्नों, नशों ,सिर्पों द्वारा रोगों के मूल कारणों को दबाने के प्रयास का फल मात्र ही हैं ।
३प्रक्रितिक् क्षमता- प्राकृतिक चकित्सा प्रणाली का तीसरा सुनहरी सिधांत हैं शरीर में विराजमान रोग को अपने आप ठीक करने कि असाधारण योग्यता हमारा शरीर रोगी हो जाने के बाद शरीर में ईकठे हो गए तोक्सिन्ज़ को विभिन्न तरीकों से बाहर निकालने के बाद आपनी नोर्मल स्तिथि में आपने आप आ जाता है । वीग्यनिकों के अनुसार हमारे शरीर में तोक्सिन ज्यादा मात्र में ईकठे होने से हमारी गरन्थिओं को ,गुर्दों,चमडी,फेफड़ों,आदि को आवश्यकता से अद्धिक काम करना पड़ता है,पर फिर भी हमारा शरीर तोक्सिनो को शरीर से बाहर निकलने में असमर्थ रहता है। ईस के अतिरिक्त मानसिक तनाव तथा अन्य कारण हमारे अश्रीर के लाखों सेलों के विद्युत मंडल को तोक्सिनो के कारण अव्यवस्थित कर तोक्सेनो को बढावा देतें हैं।
प्राक्रतिक चकित्सा के तरीके :-
प्राकृतिक चकिसा का मूल उदेश्य शरीर के बिगड़े यां अवय्वस्थित हो चुके क्रिया कलापों ऑउर सतिथियों को पुनार्वय्वस्थित करना है। us के लिए हमें वही ढंग तरीके अपनाने पद्तें हैं । ये तरीके हैं वमन ,आदि से शरीर में ईकठे हो गए तोक्सीनो यां विशेले पदार्थों को निकल बाहर फेकना । पर ईस क्रिया में भी यह ध्यान रखा जाता है कि शरीर के मुख्य अंगों को कोई क्षति नो हो।
ईस के लिए सर्वोपरी आवश्यकता है , भोजन को ठीक करना । शरीर के तोक्सिनो को निकल बाहर प्केकने के लिए आवश्यक है कि भोजन से तेजाबी मदमादा पैदा करने वाले करने वाले पदार्थों को निकल दिया जाए.प्रोटीन,स्टार्च,फेट्स पैदा करने वाली चीजें छोड़ कर केवल ताजा फलोंka ही सेवन किया जाए ईस से पेट ऑउर विसर्जन नद्दियों में पैदा हो चुके कीटाणु नष्ट हो जजेंगे.कई सतिथियों में उपवास कि सलाह भी दी जाती है .ईस पारकर के वर्तों में फलों का रस लिया जा सकता है.लेकिन वह bhii jabआप को उचित maTRaa में भूख ना लगे.शास्तों के अनुसार भूख न लग्न या भूख से पहले या आधिक khanaa भी रोगों का कारण है । doostra mahatv sidhanta है शरीर को उचित maaTRaa में satumilate करना iis ke liye pet par thande paanii ka paryog karna nadii sannan तन sannan aadii dvaraa शरीर के अंगों को ऑउर dimagii प्रणाली को utejit करना tiisra tariika है khulii हवा मैं tahlna, yog-pranayam करना,malish करना आदि shamil हैं ईस से शरीर के murda cell punarjivit हो jasten हैं or मनुष्य का oj tej badhata है,pratirodhakshaktii badhtii है । शरीर को रोगों तथा tanavon से mukti miltii है.विशेष jankari के लिए sampark करें=-०९८१५०७५४९३ jyotshi padam kumar .
.