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Saturday, 8 March 2008

प्राकृतिक च्कित्सा के मूल सिद्धांत

प्राकृतिक चकित्सा प्रणाली तीन मूल सिद्धांतो पर आधारित है ।जो इस प्रकार हैं :-
१ विसर्जन प्रणाली -कब्ज यां विसर्जन प्रणाली सभी रोगों की मां है। कब्ज अर्थात विसर्जन योग्य यां फालतू पदार्थों का शरीर से बाहर न निकलना । एक सामान्य प्राणी में ये विसर्जन पदार्थ विभिन विसजन अंगो से बाहर निकल जातें हैं ,जब के रोगी के शरीर में ये फालतू पदार्थ धीरे धीरे इकठेहोते रहतें हैं । कारण भोजन की गलत आदतें .तरीके ,ऑउर भोजन पदार्थ इस के अतिरिक्त अधिक चिंता ,अत्यधिक श्रम.आलस्य ,बेवक्त सोना ,गलत स्तिथि में यां चलते फिरते खाना-पीना आदि कई बार व्यर्थ की चेष्ठएं भी विसर्जन पर्नाली में अव्यवस्था का कारण बन जाती हैं ।
अधिक दवाई का प्रयोग -बुखार,सर्दी ,जुकाम,पेट की गडबडी आदि कई प्रकार के रोग हमारे शरिम ईक्ठीहो गई गंदगी को बाहर निकलने का एक प्रयास मात्र हैं । विशेषज्ञों ने आपने अनुसिधंतों में पाया है कि हृदय रोग ,ब्लड-प्रेशर,मदुमेह[दिअब्तिजगुर्दे के रोग ,नेमोनिया आदि दवाईयों ,ईन्जेक्स्नों, नशों ,सिर्पों द्वारा रोगों के मूल कारणों को दबाने के प्रयास का फल मात्र ही हैं ।
३प्रक्रितिक् क्षमता- प्राकृतिक चकित्सा प्रणाली का तीसरा सुनहरी सिधांत हैं शरीर में विराजमान रोग को अपने आप ठीक करने कि असाधारण योग्यता हमारा शरीर रोगी हो जाने के बाद शरीर में ईकठे हो गए तोक्सिन्ज़ को विभिन्न तरीकों से बाहर निकालने के बाद आपनी नोर्मल स्तिथि में आपने आप आ जाता है । वीग्यनिकों के अनुसार हमारे शरीर में तोक्सिन ज्यादा मात्र में ईकठे होने से हमारी गरन्थिओं को ,गुर्दों,चमडी,फेफड़ों,आदि को आवश्यकता से अद्धिक काम करना पड़ता है,पर फिर भी हमारा शरीर तोक्सिनो को शरीर से बाहर निकलने में असमर्थ रहता है। ईस के अतिरिक्त मानसिक तनाव तथा अन्य कारण हमारे अश्रीर के लाखों सेलों के विद्युत मंडल को तोक्सिनो के कारण अव्यवस्थित कर तोक्सेनो को बढावा देतें हैं।
प्राक्रतिक चकित्सा के तरीके :-
प्राकृतिक चकिसा का मूल उदेश्य शरीर के बिगड़े यां अवय्वस्थित हो चुके क्रिया कलापों ऑउर सतिथियों को पुनार्वय्वस्थित करना है। us के लिए हमें वही ढंग तरीके अपनाने पद्तें हैं । ये तरीके हैं वमन ,आदि से शरीर में ईकठे हो गए तोक्सीनो यां विशेले पदार्थों को निकल बाहर फेकना । पर ईस क्रिया में भी यह ध्यान रखा जाता है कि शरीर के मुख्य अंगों को कोई क्षति नो हो।
ईस के लिए सर्वोपरी आवश्यकता है , भोजन को ठीक करना । शरीर के तोक्सिनो को निकल बाहर प्केकने के लिए आवश्यक है कि भोजन से तेजाबी मदमादा पैदा करने वाले करने वाले पदार्थों को निकल दिया जाए.प्रोटीन,स्टार्च,फेट्स पैदा करने वाली चीजें छोड़ कर केवल ताजा फलोंka ही सेवन किया जाए ईस से पेट ऑउर विसर्जन नद्दियों में पैदा हो चुके कीटाणु नष्ट हो जजेंगे.कई सतिथियों में उपवास कि सलाह भी दी जाती है .ईस पारकर के वर्तों में फलों का रस लिया जा सकता है.लेकिन वह bhii jabआप को उचित maTRaa में भूख ना लगे.शास्तों के अनुसार भूख न लग्न या भूख से पहले या आधिक khanaa भी रोगों का कारण है । doostra mahatv sidhanta है शरीर को उचित maaTRaa में satumilate करना iis ke liye pet par thande paanii ka paryog karna nadii sannan तन sannan aadii dvaraa शरीर के अंगों को ऑउर dimagii प्रणाली को utejit करना tiisra tariika है khulii हवा मैं tahlna, yog-pranayam करना,malish करना आदि shamil हैं ईस से शरीर के murda cell punarjivit हो jasten हैं or मनुष्य का oj tej badhata है,pratirodhakshaktii badhtii है । शरीर को रोगों तथा tanavon से mukti miltii है.विशेष jankari के लिए sampark करें=-०९८१५०७५४९३ jyotshi padam kumar .
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