धर्मं से रहित व्यक्ति नंगा हे । धर्म की तुलना में सभी पद पदार्थ तुच्छ हें .यदि कोइ सामाजिक मान प्रतिष्ठा के लिये धर्म त्याग देता हे तो वह अधर्मी होगा । अधर्मी अर्थात धर्म रहित धर्म के विषय में देखें तो दो ही विश्व धर्मं हे । एक वैदिक सनातन हिंदू धर्मं दूसरा समय व प्रिस्तिथी से पैदा हुआ धर्मं ।
चोरी ना करना ,सच बोलना आदि आदि गुन सनातन धर्म है, कुछ धर्मं एक निश्चित समय पर पैदा हुए विक्सत हुए ओर जो निश्चित समय पर पैदा हुआ है us कि moot bhee
कुछ
Oldest and scientific religon of the world,where you do not require any baptisma to be . One is Hindu by birth,one can be Hindu even if he or she follows any system of worship or does not believe in GOD .
Monday, 30 April 2007
जय श्री राम
************सुचना***************
शुक्रवार ३ मई २००७ शाम ५.३० से ७ बजे तक
प्रेमसरोवर कुटी या ,तिन कोनी , गोनियाना रोड
के निकट झुग्गियों में
विश्व हिन्दू परिषद की ओर से
भागवत कीर्तन का आयोजन किया गया हे
समय पर पधार कर दर्शन दें ,।
सभी कार्यकर्ता
विश्व हिन्दू परिषद
शुक्रवार ३ मई २००७ शाम ५.३० से ७ बजे तक
प्रेमसरोवर कुटी या ,तिन कोनी , गोनियाना रोड
के निकट झुग्गियों में
विश्व हिन्दू परिषद की ओर से
भागवत कीर्तन का आयोजन किया गया हे
समय पर पधार कर दर्शन दें ,।
सभी कार्यकर्ता
विश्व हिन्दू परिषद
Saturday, 28 April 2007
सनातन का अर्थ
सनातान का अर्थ है जिसकी मौत ना हो । जिसकी कोई सीमा ना हो । जो सदा सत्य के रुप में हो ,कभी पुराना ना हो ,वह सनातन है । धर्म का अर्थ हे धारण करना [पहनना ]वेद में बताये हुये सत्य ज्ञान को धारण कराने वाला धर्मात्मा कहलाता हे
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